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Tuesday, November 24, 2020

धनिया एक उपयोगी औषधि

धनिया उपचार
मूत्राशय की जलन- खुश्क धनिये की गिरी और कूजा मिश्री दोनों तीन तीन सौ ग्राम
बनाने की विधि - खुश्क धनिया लेकर मोटा-मोटा कूटकर इसका छिलका अलग करें और बीजों के अंदर की गिरी ले ले ।इस नुस्खे में यही गिरी 300 ग्राम चाहिए ।साधारणतः साडे 400 ग्राम धनिया में तीन सौ ग्राम गिरी निकल आती है यदि कूजा मिश्री ना मिले तो इसके स्थान पर तवे की मिश्री, देसी चीनी या दानेदार चीनी नुस्खे में शामिल करें । इससे दवा के प्रभाव में कोई अंतर नहीं पड़ेगा ।
दोनों वस्तुओं को अलग-अलग पीसकर आपस में मिला लें ।
लाभ :- यह औषधि मूत्राशय की उत्तेजना को दूर करने के लिए एक अद्वितीय चिकित्सा है ।इसके प्रयोग से पोटासी ब्रोमाइड की तरह दिल और दिमाग कमजोर नहीं होते बल्कि इन्हें बल मिलता है नजर की कमजोरी,घबराहट , सिर दर्द चक्कर नींद ना आना आदि रोगों में जो योन अव्यवस्थाओं या प्रमेय स्वप्नदोष के परिणाम स्वरूप प्रकट होते हैं मे यह अत्यंत लाभकारी औषधि है ।
स्वप्नदोष के लिए यह औषधि इतनी हितकर है कि सख्त से सख्त स्वप्नदोष यहां तक कि प्रतिदिन दो चार बार होने वाला स्वप्नदोष भी इसकी पहली ही दिन कि 2 खुराकों से रुक जाता है।
प्रमेह के लिए भी यह इतनी गुणकारी है कि इसके पश्चात दी जाने वाली औषधि के लिए इस कष्ट में अधिक तथा तुरंत सफल होने की संभावना रहती है यह औषधि हाजमा तेज करने का गुण भी रखती है।
सेवन विधि :- प्रातः बिना कुछ खाए पिए रात के बासी पानी से 8 ग्राम फांक लें और तत्पश्चात 1 घंटे तक और कुछ ना खाए इसी प्रकार 8 ग्राम सांय 4:00 बजे के पश्चात प्रातः के रखे हुए पानी के साथ फांक लें रात का भोजन इसके 2 घंटे पश्चात करें ।
नोट :- यदि सोच यदि अधिक पतले दस्त के रूप में होता है तो दूसरी मात्रा से 4:00 बजे लेने के बजाए रात्रि समय सोने से आधा घंटा पहले ले परंतु यदि कब्ज की शिकायत अधिक रहती हो तो दूसरी मात्रा 4:30 बजे ही लें और रात्रि को सोते समय ईसबगोल की भूसी या इसबगोल का छिलका 45 ग्राम लेकर 10-15 ग्राम ताजा पानी से फाकिये । बिना किसी कष्ट के साफ शौच होगा ।
ईसबगोल का उपयोग पहली रात्रि को थोड़ी मात्रा में करें ।यदि इससे लाभ ना हो तो दूसरी रात्रि को इसकी मात्रा बढ़ा ले ।यहां तक की प्रातः साफ शौच होने लगे (4-5 ग्राम से लेकर 15 ग्राम तक का यही अर्थ है) ईसबगोल में एक गुण यह भी है कि यह हानि रहित और कब्ज नाशक होने के अतिरिक्त पतले वीर्य को गाढ़ा करने ,स्वप्नदोष और मूत्राशय की उत्तेजना को दूर करने के लिए उपरोक्त औषधि की विशेष सहायता करता है।
दूसरा योग :- सफेद मूसली और मिश्री 5050 ग्राम मिलाकर चूरन बना ले ।
सेवन विधि- 4 से 6 ग्राम जरूरत के मुताबिक उपयोग करें इससे वीर्य की उत्तेजना दूर हो जाती है मूत्राशय की उत्तेजना ठीक हो जाती है और सब अपने दोस्त को निश्चय ही लाभ होता है यह औषधि बल दायक है और अधिक वीर्य उत्पन्न करती है।
सरदर्द :- खुश्क धनिया 8 ग्राम, खुश्क आंवले 4 ग्राम ,दोनो को रात्रि मे कुंजे(मिटटी के घडे) मे 250 ML पानी मे भिगो कर रख दे । अगले दिन प्रातः मलकर और मिश्री मिलाकर सुबह मे लेने से गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द मे आराम मिलता है ।
कमजोर दिमाग - सवा सौ ग्राम धनिया अच्छे से कूट पीटकर आधा किलो पानी मे उबालें। जब पानी केवल सवा सौ ग्राम रह जाए तो छानकर सवा सौ ग्राम मिश्री मिलाकर फिर पकाएं। जब पीकर गाढा हो जाए तो उतार ले । यह मीठी चटनी हर रोज आठ ग्राम चाटनी है । गर्मी और दिमाग की कमजोरी के कारण आंखो के सामने अंधेरा सा छा जाता है तो यह इसका अत्यंत ही सरल और प्रभावकारी उपाय है ।
नोट :- यह लेख और उपाय आयुर्वेद की पुरानी पुस्तकों से लिए गये है । इन्हे आजमाने से पहले इन पर पूर्ण भरोसा करकर ही यह उपाय करे । मधुमेह के रोगी यह उपाय न करे क्यूकि मिश्री के सेवन से मधुमेह स्तर के बढने का खतरा हो सकता है।
धन्यवाद
हेमन्त कुमार शर्मा
What's App -9624754206)

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