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Thursday, November 1, 2018

दैनिक दिनचर्या नियम


🌻 *घुटनो का दर्द* 🌻

हड्डियों में लिक्विडिटी की कमी से घुटनों में दर्द होना आज कल आम हो गया है, 40 वर्ष की आयू  के बाद आज हर दूसरे व्यक्ति को घुटनो की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
इसका मुख्य कारण है हमारा गलत खानपान और गलत जीवन शैली।
कुछ छोटे उपाय अपना कर हम घुटनो के दर्द से बच सकते हैं।
5
उँगलियों के पाँच नियम हर किसी को अपनाने चाहिए
1)
आयोडिन युक्त नमक के स्थान पर सभी जगह सैंधा नमक का उपयोग करे ।
2)
सुबह मे उठने के बाद बिना कुलला किए 2 गिलास पानी (हल्का गुनगुना हो तो अति उत्तम ) बैठकर घूंट घूंट करके पिएँ ।
3) & 4)
खाने से एक घंटे पहले , एक घंटे बाद तक और खाते खाते पानी नही पीना है ।
5)
रात को सोने से पहले एक चम्मच गाय का घी हल्के गुनगुने पानी मे डालकर बैठकर घूटघूट कर पिएँ ।
*
खड़े होकर कभी पानी न पियें।*
 *
रिफाइंड तेल का कभी प्रयोग न करें, भोजन में तिल का तेल, सरसों का तेल या देशी घी का प्रयोग करें।*
*40
की उम्र के बाद हफ्ते में 2 दिन सरसों तेल की मालिश घुटनो में जरूर करें, इससे तरलता बनी रहती है, जोड़ों में घिसाव नही होता।*
*
शाम को 4 बजे के बाद किसी भी प्रकार की खटटी वसतू का सेवन न करे ।
*
बासी भोजन , ठंडा पानी या फ्रिज की वसतू का सेवन न करे ।
* 45
वर्ष की आयू के बाद शरीर मे कैल्शियम बनना बंद हो जाता है जिससे शरीर के अन्य हिससो पर असर पड़ता है ।चूना (जो पान मे खाते है ), दूध और केला कैल्शियम के अच्छे सत्रोत है । हर रोज सुबह 9 बजे के आसपास गेहूँ के दाने के बराबर चूना एक गिलास पानी मे मिलाइए और फिर उसके ऊपर एक केला खा लीजिए । केला खाने के बाद 15-20 मिनट सूर्य की रोशनी मे बैठिए । इससे आपको कैल्शियम और विटामिन डी प्रचूर मात्रा मे मिल जाएगा । ऐसा आपको हर रोज करना है ।
(
नोट :- पथरी की समस्या से पीड़ित मरीजों को चूने का सेवन नही करना है ।)

जिन लोगों को घुटनों में दर्द शुरू हो चुका है उनके लिए ये उपाय फायदेमंद साबित होंगे।

 *21
दिन तक नियमित 5 अखरोट की गिरी का सेवन करें।*
 *
नारियल खाने से भी जोड़ों के दर्द समाप्त होते हैं, रोजाना नारियल का सेवन करें।*
*
घुटनों के दर्द के लिए एक तेल बनाने की विधि दे रहा हूँ, इस तेल की मालिश से अर्थराइटिस में भी आराम मिलता है।

250
ग्राम तिली का तेल ले  इसे गर्म करे और गर्म होने पर इसमें दो चम्मच सौंठ पाउडर और दो चम्मच अजवाइन डाल दे, उसके बाद आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर दाल दे ,उसके थोड़ी देर बाद 8-10 लहसुन की कच्ची कली छीलकर तेल मे डाल दे और लहसुन कली के काली पड़ने पर गैस बंद कर दे । फिर उस तेल मे 5-6 कपूर की डली ठाल दे । ठंडा होने पर इस तेल को छानकर किसी काँच की बोतल मे भर दे और फिर इस तेल की जोडो पर और कमर पर (अगर कमर दर्द हो तो ) हल्के हाथ से मालिश करे ।


हल्का गरम इस तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द में विशेष आराम मिलता है|
दिन में 3 -4 बार मालिश करना उचित है।

धन्यवाद
हेमन्त कुमार शर्मा

Monday, October 15, 2018

आयुर्वेदिक फेस पैक

*आयुर्वेदिक फेस पैक*
नमस्ते दोस्तो । आज हम यहा आपको आयुर्वेदिक फेस पैक के बारे मे बताने जा रहे है ।हम लोग अपने चेहरे को आकर्षक और चमकदार बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की महंगी फेस पैक और क्रीम का उपयोग करते है जिनमे अधिकतर कैमिकल का उपयोग होता है । जो कि आगे चलकर हमारी त्वचा और शरीर को नुकसान पहुंचाती है। हमे इन कैमिकल युक्त फेस पैक और क्रीम की जगह आयुर्वेदिक फेस पैक का इस्तेमाल करना चाहिए  जो कि मुल्तानी मिट्टी, सफेद चंदन ,संतरे के छिलके का पाउडर ,हल्दी, बेसन इत्यादि आयुर्वेदिक औषधियो से मिलाकर तैयार की जाती है और जिसका हमारे शरीर या त्वचा पर भी कोई दुष्प्रभाव नही होता है।
*उपयोग करने का तरीका* :- सबसे पहले अपने चेहरे को साफ पानी से धो ले। फिर आधा चम्मच फेस पैक पाउडर ले । फिर उस पाउडर मे गुलाब जल या कच्चा दूध या थोडा पानी मिलाऐ। इसे अच्छे से मिलाकर इसे अपने दोनो हाथो से चेहरे पर लगाकर हल्के हाथ से पाउडर के सूखने तक रगडते रहे । सूखने के बाद इसे 15-20 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़दे।फिर इसे ठंडे पानी से धो ले । आपका चमकता और दमकता चेहरा तैयार । यह फेस पैक इस्तेमाल करने के बाद आपको किसी अन्य क्रीम की जरूरत भी नही रहेगी ।
*अधिक जानकारी या आयुर्वेदिक फेस पैक के लिए संपर्क करे* ।
हेमन्त कुमार शर्मा
Whats app :-09624754206
Mobile No :- 08141584064

Wednesday, September 5, 2018

*बथुवा*


*बथुवा*

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बथुवा अंग्रेजी में Lamb's Quarters, वैज्ञानिक नाम Chenopodium album.

साग और रायता बणा कर बथुवा अनादि काल से खाया जाता  रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि *हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए प्लस्तर में बथुवा मिलाते थे* और हमारी बुढ़ियां *सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुवै के पाणी से बाल धोया करती।* बथुवा गुणों की खान है और *भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं तभी तो मेरा भारत महान है।*

बथुवै में क्या क्या है?? मतलब कौन कौन से विटामिन और मिनरल्स??

तो सुणो, बथुवे में क्या नहीं है?? *बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर है तथा बथुवे में कैल्शियम,  लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43  Kcal होती है।*

जब बथुवा शीत (मट्ठा, लस्सी) या दही में मिला दिया जाता है तो *यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बण जाता है* और साथ में बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड़ की डळी हो तो इस खाणे के लिए देवता भी तरसते हैं।

जब हम बीमार होते हैं तो आजकल डॉक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली ही खाणे की सलाह देते हैं ना??? गर्भवती महिला को खासतौर पर विटामिन बी, सी व लोहे की गोली बताई जाती है और बथुवे में वो सबकुछ है ही, कहणे का मतलब है कि *बथुवा पहलवानो से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है।*

यह साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है।  बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करें। नमक न मिलाएँ तो अच्छा है, यदि स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो काला नमक मिलाएँ और देशी  गाय   के घी से छौंक लगाएँ। बथुए का उबाला हुआ पानी अच्छा लगता है तथा दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है। किसी भी तरह बथुआ नित्य सेवन करें। *बथुवै में  जिंक होता है जो कि शुक्राणुवर्धक है मतलब किसै भाई कै जिस्मानी कमजोरी हो तै उसनै बी दूर कर सै बथुवा।*

बथुवा कब्ज दूर करता है और अगर *पेट साफ रहेगा तो कोए भी बीमारी के शरीर में लगेगी ही नहीं, गात म्हं ताकतऔर स्फूर्ति बनी रवैगी।*

कहने का मतलब है कि जब तक इस मौसम में बथुए का साग मिलता रहे, नित्य इसकी सब्जी खाएँ। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी पीएँ और तो और *यह खराब लीवर को बी ठीक कर देता है।*

*पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुए के रस में शकर मिलाकर नित्य पिएँ तो पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी।*

मासिक धर्म रुका हुआ हो तो दो चम्मच बथुए के बीज एक गिलास पानी में उबालें । आधा रहने पर छानकर पी जाएँ। मासिक धर्म खुलकर साफ आएगा। आँखों में सूजन, लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खाएँ।

पेशाब के रोगी बथुआ आधा किलो, पानी तीन गिलास, दोनों को उबालें और फिर पानी छान लें । बथुए को निचोड़कर पानी निकालकर यह भी छाने हुए पानी में मिला लें। स्वाद के लिए नींबू जीरा, जरा सी काली मिर्च और काला नमक लें और पी जाएँ।

*आप ने अपने दादा दादी से ये कहते जरूर सुणा होगा कि हमने तो सारी उम्र अंग्रेजी दवा की एक गोली भी नहीं ली। उनके स्वास्थ्य व ताकत का राज यही बथुवा ही है।*

मकान को रंगने से लेकर खाने व दवाई तक बथुवा काम आता है और हाँ सिर के बाल ...... के करेगा शम्पू इसकै आगै।

लेकिन अफशोस, *हम किसान ये बातें भूलते जा रहे हैं और इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने अपने खेतों में जहर डालते हैं।* म्हारै तै बावळा कुण होवैगा???

*तथाकथित कृषि वैज्ञानिकों (अंग्रेज व काळे अंग्रेज) ने बथुवै को भी कोंधरा, चौळाई, सांठी, भाँखड़ी आदि सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया और हम भारतीय चूं भी ना कर पाये।*
अब कटाक्ष --
और पढ़ ल्यो अंग्रेजी और बण ल्यो अंग्रेज, सुणो जै ना सुधरे नै तै *एक दिन इस जहर तैं कैंसर बरगी बीमारी आपा नै सबनै मारैगी* क्योंकि आपां ए इस स्वर्ग बरगी जमीन नै जहर गेर कै नरक बणाण लाग रे सां। 🙏
भगवान् सिंह भदौरिया
9335980992


बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगें।

*🌾बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगें।
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 🌾बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा है, उससे अधिक उसमें गुण भी हैं।
🌾- बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग *आस्टियोपोरोसिस* और खून की कमी यानी *एनीमिया* नहीं होता।
🌾- बाजरा *लीवर* से संबंधित रोगों को भी कम करता है।
🌾- गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में *ऊर्जा* कई गुना है।
 🌾- बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। उधर *आयरन* भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते।
🌾- खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए।
🌾- वरिष्ठ चिकित्साधिकारी मेजर डा. बी.पी. सिंह के सेना में सिक्किम में तैनाती के दौरान जब गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी। इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक *कैल्शियम और आयरन* की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे।
🌾-इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में *असामान्य पीड़ा* के मामले भी न के बराबर पाए गए।
 🌾- डाक्टर तो बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में *वज्र* की उपाधि देने में जुट गए हैं।
🌾- बाजरे का किसी भी रूप में सेवन लाभकारी है।
🌾*लीवर की सुरक्षा* के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है।
🌾- *उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी* के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।
🌾- यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह *कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्धहोने* की प्रक्रियाओं को दूर करता
🌾- रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। *यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद* न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है। यह *माइग्रेन* के लिये भी लाभदायक है।
 🌾- इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर *कोलेस्ट्रॉल* की मात्रा को कम करते हैं।
🌾- बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
*डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर* की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।
यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये की यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप सेनिवेदन है कि इसमैसेज को अपने *परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स* तक भेज दे ।आपका यह कदम *स्वस्थ भारत के निर्माण* मैं योगदान के रूप में होगा दुआ मैं बड़ी ताकत होती है।

भगवान् सिंह भदौरिया
9335980992

* शुध्द देशी घी *


* शुध्द देशी घी *

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 चमड़ा सिटी के नाम से मशहूर कानपुर में जाजमऊ से गंगा जी के किनारे किनारे 10 -12 किलोमीटर के दायरे में आप घूमने जाओ तो आपको नाक बंद करनी पड़ेगी,

 यहाँ सैंकड़ों की तादात में गंगा किनारे भट्टियां धधक रही होती हैं,
इन भट्टियों में जानवरों को काटने के बाद निकली चर्बी को गलाया जाता है,
इस चर्बी से मुख्यतः 3 चीजे बनती हैं।

1- एनेमल पेंट (जिसे हम अपने घरों की दीवारों पर लगाते हैं)

2- ग्लू (फेविकोल इत्यादि, जिन्हें हम कागज, लकड़ी जोड़ने के काम में लेते हैं)

3- और तीसरी जो सबसे महत्वपूर्ण चीज बनती है वो है "शुध्द देशी घी"

जी हाँ " शुध्द देशी घी"
यही देशी घी यहाँ थोक मंडियों में 120 से 150 रूपए किलो तक भरपूर बिकता है,

इसे बोलचाल की भाषा में "पूजा वाला घी" बोला जाता है,

इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग भंडारे कराने वाले करते हैं। लोग 15 किलो वाला टीन खरीद कर मंदिरों में दान करके पूण्य कमा रहे हैं।

इस "शुध्द देशी घी" को आप बिलकुल नही पहचान सकते
बढ़िया रवे दार दिखने वाला ये ज़हर सुगंध में भी एसेंस की मदद से बेजोड़ होता है,

औधोगिक क्षेत्र में कोने कोने में फैली वनस्पति घी बनाने वाली फैक्टरियां भी इस ज़हर को बहुतायत में खरीदती हैं,

अब आप स्वयं सोच लो आप जो वनस्पति घी " डालडा" "फॉर्च्यून" खाते हो उसमे क्या मिलता होगा।

कोई बड़ी बात नही देशी घी बेंचने का दावा करने वाली कम्पनियाँ भी इसे प्रयोग करके अपनी जेब भर रही हैं।

इसलिए ये बहस बेमानी है कि कौन घी को कितने में बेच रहा है,

अगर शुध्द ही खाना है तो अपने घर में गाय पाल कर ही आप शुध्द खा सकते हो !

भगवान् सिंह भदौरिया
9335980992

*रोगों की दुश्मन: लौकी (घिया)*

*रोगों की दुश्मन: लौकी (घिया)*
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हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो लौकी को खाना पसंद नही करते किन्तु लौकी एक ऐसी सब्जी है जो मनुष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है, मोटापा, BP, शुगर, स्किन प्रॉब्लम, बालों के रोग, पेट की कब्ज लौकी के नियमित सेवन करने वाले व्यक्ति से दूर रहते हैं।
लौकी की सब्जी को ज़्यादा तेल, मसाले, मिर्च के साथ नही बनाना चाहिए इसे देशी घी के साथ पकाने से इसके गुण बढ़ जाते हैं,
सब्जी के अलावा लौकी की बर्फी भी बहुत प्रयोग की जाती है।
शुगर, मोटापे, BP से पीड़ित व्यक्तियों को सुबह खाली पेट लौकी के जूस का सेवन करना चाहिए।
*लौकी के जूस को बनाने की विधि:*
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200 ग्राम साफ लौकी छिलके सहित छोटे टुकड़ों में काट कर पानी में रख दें, इसमें 5 कली लहसुन, 5 पुदीना के पत्ते, 5 तुलसी के पत्ते इसमें मिला लें।

5 मिनट बाद इसे जूसर से रस निकाल लें या ग्राइंडर में डाल कर बारीक पीस कर कपड़े से छान कर रस निकाल लें,
इस रस में थोड़ा सेंधा नमक मिला कर इसको सुबह खाली पेट एक कप पी लेना चाहिए।
👉 ये कोलेस्ट्रॉल की सबसे अच्छी दवा है।
BP नियंत्रित रहेगा, शुगर इसके नियमित प्रयोग से कंट्रोल में रहने लगेगी, बालों के रोग, रूसी, बालों का रूखापन खत्म हो जाएगा।
चेहरे से झुर्रियां हट जाएंगी, स्किन पर ग्लो आएगा।
इस जूस को 90 दिन नियमित पीने के बाद 10 दिन का ब्रेक दे कर पुनः शुरू करना चाहिए।

।। जय श्री हरि ।।
भगवान् सिंह भदौरिया
9335980992

*दुबले – पतले लोगों के लिए – पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक)*


*दुबले पतले लोगों के लिए पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक)*
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काले उड़द, गेहूँ, जौ व छिलका सहित देशी चने का आधा आधा किलो आटा देशी घी में भून लें |
स्वाद अनुसार इसमें काजू, बादाम, पिस्ता, छोटी इलायची, केसर इत्यादि मिला लें।
2 किलो गुड़ या चीनी की चाशनी में भुने हुए आटे को डाल के छोटे छोटे लड्डू बना लें |
सुबह शाम 1 -1 लड्डू अपनी पाचनशक्ति के अनुकूल खूब चबा चबाकर खायें | ऊपर से एक गिलास मिश्री मिला मीठा दूध पी लें |
यह शक्ति, बल व वीर्यवर्धक, चुस्ती-फुर्ती देनेवाला और शरीर को सुडौल बनानेवाला है | सेवनकाल में आसन- व्यायाम करते रहें |
परहेज: अधिक मसालेदार, तले व खट्टे पदार्थो ( विशेषरूप से इमली एवं अमचुर ) से परहेज रखें |

।। जय श्री हरि ।।
भगवान सिंह भदौरिया
9335980992


हमारा भोजन ही हमारा अमृत है ।

आप सभी को नमस्कार ।एक बात है की आजकल हर कोई Short Cut में पड़ा हुआ है । और कैसा भी हो बस स्वाद चाहिए चाहे वो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ह...