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Tuesday, November 24, 2020

धनिया एक उपयोगी औषधि

धनिया उपचार
मूत्राशय की जलन- खुश्क धनिये की गिरी और कूजा मिश्री दोनों तीन तीन सौ ग्राम
बनाने की विधि - खुश्क धनिया लेकर मोटा-मोटा कूटकर इसका छिलका अलग करें और बीजों के अंदर की गिरी ले ले ।इस नुस्खे में यही गिरी 300 ग्राम चाहिए ।साधारणतः साडे 400 ग्राम धनिया में तीन सौ ग्राम गिरी निकल आती है यदि कूजा मिश्री ना मिले तो इसके स्थान पर तवे की मिश्री, देसी चीनी या दानेदार चीनी नुस्खे में शामिल करें । इससे दवा के प्रभाव में कोई अंतर नहीं पड़ेगा ।
दोनों वस्तुओं को अलग-अलग पीसकर आपस में मिला लें ।
लाभ :- यह औषधि मूत्राशय की उत्तेजना को दूर करने के लिए एक अद्वितीय चिकित्सा है ।इसके प्रयोग से पोटासी ब्रोमाइड की तरह दिल और दिमाग कमजोर नहीं होते बल्कि इन्हें बल मिलता है नजर की कमजोरी,घबराहट , सिर दर्द चक्कर नींद ना आना आदि रोगों में जो योन अव्यवस्थाओं या प्रमेय स्वप्नदोष के परिणाम स्वरूप प्रकट होते हैं मे यह अत्यंत लाभकारी औषधि है ।
स्वप्नदोष के लिए यह औषधि इतनी हितकर है कि सख्त से सख्त स्वप्नदोष यहां तक कि प्रतिदिन दो चार बार होने वाला स्वप्नदोष भी इसकी पहली ही दिन कि 2 खुराकों से रुक जाता है।
प्रमेह के लिए भी यह इतनी गुणकारी है कि इसके पश्चात दी जाने वाली औषधि के लिए इस कष्ट में अधिक तथा तुरंत सफल होने की संभावना रहती है यह औषधि हाजमा तेज करने का गुण भी रखती है।
सेवन विधि :- प्रातः बिना कुछ खाए पिए रात के बासी पानी से 8 ग्राम फांक लें और तत्पश्चात 1 घंटे तक और कुछ ना खाए इसी प्रकार 8 ग्राम सांय 4:00 बजे के पश्चात प्रातः के रखे हुए पानी के साथ फांक लें रात का भोजन इसके 2 घंटे पश्चात करें ।
नोट :- यदि सोच यदि अधिक पतले दस्त के रूप में होता है तो दूसरी मात्रा से 4:00 बजे लेने के बजाए रात्रि समय सोने से आधा घंटा पहले ले परंतु यदि कब्ज की शिकायत अधिक रहती हो तो दूसरी मात्रा 4:30 बजे ही लें और रात्रि को सोते समय ईसबगोल की भूसी या इसबगोल का छिलका 45 ग्राम लेकर 10-15 ग्राम ताजा पानी से फाकिये । बिना किसी कष्ट के साफ शौच होगा ।
ईसबगोल का उपयोग पहली रात्रि को थोड़ी मात्रा में करें ।यदि इससे लाभ ना हो तो दूसरी रात्रि को इसकी मात्रा बढ़ा ले ।यहां तक की प्रातः साफ शौच होने लगे (4-5 ग्राम से लेकर 15 ग्राम तक का यही अर्थ है) ईसबगोल में एक गुण यह भी है कि यह हानि रहित और कब्ज नाशक होने के अतिरिक्त पतले वीर्य को गाढ़ा करने ,स्वप्नदोष और मूत्राशय की उत्तेजना को दूर करने के लिए उपरोक्त औषधि की विशेष सहायता करता है।
दूसरा योग :- सफेद मूसली और मिश्री 5050 ग्राम मिलाकर चूरन बना ले ।
सेवन विधि- 4 से 6 ग्राम जरूरत के मुताबिक उपयोग करें इससे वीर्य की उत्तेजना दूर हो जाती है मूत्राशय की उत्तेजना ठीक हो जाती है और सब अपने दोस्त को निश्चय ही लाभ होता है यह औषधि बल दायक है और अधिक वीर्य उत्पन्न करती है।
सरदर्द :- खुश्क धनिया 8 ग्राम, खुश्क आंवले 4 ग्राम ,दोनो को रात्रि मे कुंजे(मिटटी के घडे) मे 250 ML पानी मे भिगो कर रख दे । अगले दिन प्रातः मलकर और मिश्री मिलाकर सुबह मे लेने से गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द मे आराम मिलता है ।
कमजोर दिमाग - सवा सौ ग्राम धनिया अच्छे से कूट पीटकर आधा किलो पानी मे उबालें। जब पानी केवल सवा सौ ग्राम रह जाए तो छानकर सवा सौ ग्राम मिश्री मिलाकर फिर पकाएं। जब पीकर गाढा हो जाए तो उतार ले । यह मीठी चटनी हर रोज आठ ग्राम चाटनी है । गर्मी और दिमाग की कमजोरी के कारण आंखो के सामने अंधेरा सा छा जाता है तो यह इसका अत्यंत ही सरल और प्रभावकारी उपाय है ।
नोट :- यह लेख और उपाय आयुर्वेद की पुरानी पुस्तकों से लिए गये है । इन्हे आजमाने से पहले इन पर पूर्ण भरोसा करकर ही यह उपाय करे । मधुमेह के रोगी यह उपाय न करे क्यूकि मिश्री के सेवन से मधुमेह स्तर के बढने का खतरा हो सकता है।
धन्यवाद
हेमन्त कुमार शर्मा
What's App -9624754206)

Friday, September 18, 2020

घी की ताकत

 झूठ:--- घी से फैट बढ़ता है,कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।


सत्य:--- घी आयुर्वेद और चरक के अनुसार सबसे शक्तिशाली खाद्य पदार्थ है।। घी से फैट कभी नही बढ़ता और न ही कोलेस्ट्रॉल.....बशर्ते वो भारत की देसी गाय का शुद्ध घी हो।  घी से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है या फैट बढ़ता है ये वर्तमान डॉक्टरों का पोंगा-ज्ञान है।। भारत की देसी गाय का शुद्ध घी एक औषधि है जो आंखों की ज्योति बढ़ाने से लेकर हार्ट अटैक तक से बचाता है।।मगर कान्वेंट स्कूल से पढ़े गंवारों को कौन समझाए और अंग्रेज़ी शिक्षा प्राप्त डॉक्टर जो खुद तरह तरह की बीमारियों से ग्रसित है,उनके मुंह कौन लगे। अनाज से 25 गुना ज्यादा ताकतवर मांस होता है और मांस से 25 गुना ज्यादा ताकतवर गाय का घी होता है:---महर्षि चरक

Wednesday, August 19, 2020

तीन सफेद जहर

 आप सभी को  मेरा नमस्कार ।

अगर हम लोग  तीन सफेद जहर का त्याग कर दे तो हम काफी बीमारीयो से बच सकते है ।

प्रेशर कुकर ऐलयूमीनियम का बनता है । ऐलयूमीनियम के बर्तनो का त्याग कर दे ।

तीन सफेद जहर है 

1 जहर :-आयोडीन युक्त नमक (इसके स्थान पर सभी लोग सैंधा नमक प्रयोग करे ।)।

2 जहर :- सफेद चीनी (इसकी जगह पर देशी गुड या मिश्री का प्रयोग करे )

3 जहर :- मैदा और मैदा से बनी चीजे (पाव भाजी ,बडा पाव ,ब्रेड, पिज्जा,सैंडविच इत्यादि) मैदे के स्थान पर गेंहू के आटे का उपयोग करे ।

ऐलयूमीनियम  के बर्तनो के स्थान पर अगर मिट्टी के बर्तनो का उपयोग करे तो सर्वश्रेष्ठ है ।

सब्जी बनाने के लिए  ऐलयूमीनियम की कढाई का उपयोग न करे । अगर हो सके तो तांबा या पीतल या फिर लोहे की कढाई जो कि हर जगह आसानी से मिल सकती है उसका उपयोग करे ।रिफाइंड तेल के स्थान पर गाय का शुद्ध देशी घी या फिर कच्ची घानी के तेल का उपयोग करे ।

फ्रिज का उपयोग कम से कम और न ही करे तो बेहतर रहेगा ।

आप सभी सिर्फ चार महीने ही इन नियमो का पालन करके देखिए और आप खुद आंकलन करिए कि पहले आप कितने बीमार रहते थे और अब कितने रहते है ।जब तक आपकी दिनचर्या या खानपान सही नही है तब तक आप स्वस्थ्य नही हो सकते ।आपका स्वास्थ्य आपके हाथ ।

धन्यवाद 

हेमन्त कुमार शर्मा

Tuesday, May 7, 2019

आमलकी रसायन

आमलकी रसायन के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि

आमलकी रसायन पित्त को कम करने वाला है। यह एसिडिटी को ठीक करता है। इसके सेवन से बल, मेधा, शक्ति और रक्त की वृद्धि होती है। यह शरीर को शक्ति देता और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है।

रसायन क्या होते हैं: आयुर्वेद में, वे जड़ी बूटी/औषधि जो दीर्घायु, स्मृति, स्वास्थ्य, जीवन शक्ति, को बढ़ावा देती हैं उन्हें रसायन कहा जाता है। रसायन मूलतः टॉनिक है जो बढ़ती उम्र का प्रभाव रोकने में लाभप्रद है, जोश में वृद्धि करनी वाली है और और रोगों का इलाज करती हैं। वे शरीर के रस और धातु को शक्ति देती है तथा शरीर के अन्य तत्वों पर लाभकारी प्रभाव डालती हैं। रसायन के सेवन से चयापचय सिस्टम मजबूत होता है और फलस्वरूप पूरे शरीर को बेहतर बनाती है। आंवला  आयुर्वेद के महत्वपूर्ण रसायन में से एक है। इसमें नमकीन स्वाद के अतिरिक्त सभी स्वाद होते है और कसैला स्वाद का मुख्य है।

आमलकी रसायन पित्त को कम करने वाला है। यह एसिडिटी को ठीक करता है। इसके सेवन से बल, मेधा, शक्ति और रक्त की वृद्धि होती है। यह शरीर को शक्ति देता और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है। यह बाल, आंखें और दिमाग के लिए अच्छा है। यह शरीर की रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसके सेवन से बाल काले रहते है और बाल गिरने बंद हो जाते है। यह बढे पित्त को कम कर देता है और इस प्रकार अम्लपित्त में राहत देता है। यह पाचन तंत्र के लिए अच्छा है। यह बार-बार होने वाले संक्रमण से बचाता है।

आंवले के गुण

कफ-हर/ खांसी में राहत
कुष्ठाघ्ना/सभी त्वचा की बीमारियों में लाभकारी
विरेचक
ज्वर-हर/बुखार में राहत
बांझपन दूर करने के वाला
उम्र के प्रभाव को रोकने के वाला
रसायन टॉनिक
आँखों के लिए अच्छा

आमलकी रसायन के घटक

आंवला चूर्ण आंवला के रस में संसाधित।

आमलकी रसायन के लाभ :-

यह रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
यह एक रसायन या टॉनिक है।
इसका सेवन पूरे स्वास्थ्य को सुधारता है।
यह शरीर को शक्ति और स्फूर्ति देता है।
यह बालों, आँखों और दिमाग को ताकत देता है।
यह शरीर से विटामिन सी की कमी को दूर करता है।
यह आयरन के अवशोषण में सहायता करता है।
यह बालों का गिरना रोकता है और उनको काला रखता है।
यह शरीर को फ्रीरैडिकल डैमेज से बचाता है।
यह एंटी-एजिंग है।
यह वृद्धावस्था में उपयोगी है।
यह अधिक पित्त को कम करता है।
यह इसके रेचक गुण के कारण कब्ज में राहत देता है।
बार-बार होने वाले संक्रमण इसके सेवन से दूर रहते हैं।
यह प्रकृति में ठंडा है और शरीर में जलन और पेप्टिक अल्सर में राहत देता है।

आमलकी रसायन के चिकित्सीय उपयोग:-

आमलकी रसायन एक टॉनिक है। यह पाचन और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह अम्लता कम कर देता है और कब्ज में राहत देता है। यह विभिन्न रोगों में लाभकारी प्रभाव दिखाता है।

सामान्य कमजोरी, थकान
आँखें, मोतियाबिन्द, दृष्टि की कमजोरी
बालों का असमय सफ़ेद होना, बाल गिरना
शरीर में जलन
अत्यधिक पित्तHyperacidity
विटामिन सी की कमी
खाँसी, ठंड, दमा, आवर्तक श्वसन रोगों
कब्ज
पेप्टिक अल्सर
वृद्धावस्था
रक्तपित्त, नक् से खून बहना, मसूड़ों से खून आना
वात-व्याधि, जोड़ों में दर्द
मूत्र संबंधी विकार

आमलकी रसायन की सेवन विधि और मात्रा :-

1-2 चम्मच (5 से 10 ग्राम) दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
इसे गर्म दूध के साथ के साथ लें।
या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

Thursday, November 1, 2018

दैनिक दिनचर्या नियम


🌻 *घुटनो का दर्द* 🌻

हड्डियों में लिक्विडिटी की कमी से घुटनों में दर्द होना आज कल आम हो गया है, 40 वर्ष की आयू  के बाद आज हर दूसरे व्यक्ति को घुटनो की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
इसका मुख्य कारण है हमारा गलत खानपान और गलत जीवन शैली।
कुछ छोटे उपाय अपना कर हम घुटनो के दर्द से बच सकते हैं।
5
उँगलियों के पाँच नियम हर किसी को अपनाने चाहिए
1)
आयोडिन युक्त नमक के स्थान पर सभी जगह सैंधा नमक का उपयोग करे ।
2)
सुबह मे उठने के बाद बिना कुलला किए 2 गिलास पानी (हल्का गुनगुना हो तो अति उत्तम ) बैठकर घूंट घूंट करके पिएँ ।
3) & 4)
खाने से एक घंटे पहले , एक घंटे बाद तक और खाते खाते पानी नही पीना है ।
5)
रात को सोने से पहले एक चम्मच गाय का घी हल्के गुनगुने पानी मे डालकर बैठकर घूटघूट कर पिएँ ।
*
खड़े होकर कभी पानी न पियें।*
 *
रिफाइंड तेल का कभी प्रयोग न करें, भोजन में तिल का तेल, सरसों का तेल या देशी घी का प्रयोग करें।*
*40
की उम्र के बाद हफ्ते में 2 दिन सरसों तेल की मालिश घुटनो में जरूर करें, इससे तरलता बनी रहती है, जोड़ों में घिसाव नही होता।*
*
शाम को 4 बजे के बाद किसी भी प्रकार की खटटी वसतू का सेवन न करे ।
*
बासी भोजन , ठंडा पानी या फ्रिज की वसतू का सेवन न करे ।
* 45
वर्ष की आयू के बाद शरीर मे कैल्शियम बनना बंद हो जाता है जिससे शरीर के अन्य हिससो पर असर पड़ता है ।चूना (जो पान मे खाते है ), दूध और केला कैल्शियम के अच्छे सत्रोत है । हर रोज सुबह 9 बजे के आसपास गेहूँ के दाने के बराबर चूना एक गिलास पानी मे मिलाइए और फिर उसके ऊपर एक केला खा लीजिए । केला खाने के बाद 15-20 मिनट सूर्य की रोशनी मे बैठिए । इससे आपको कैल्शियम और विटामिन डी प्रचूर मात्रा मे मिल जाएगा । ऐसा आपको हर रोज करना है ।
(
नोट :- पथरी की समस्या से पीड़ित मरीजों को चूने का सेवन नही करना है ।)

जिन लोगों को घुटनों में दर्द शुरू हो चुका है उनके लिए ये उपाय फायदेमंद साबित होंगे।

 *21
दिन तक नियमित 5 अखरोट की गिरी का सेवन करें।*
 *
नारियल खाने से भी जोड़ों के दर्द समाप्त होते हैं, रोजाना नारियल का सेवन करें।*
*
घुटनों के दर्द के लिए एक तेल बनाने की विधि दे रहा हूँ, इस तेल की मालिश से अर्थराइटिस में भी आराम मिलता है।

250
ग्राम तिली का तेल ले  इसे गर्म करे और गर्म होने पर इसमें दो चम्मच सौंठ पाउडर और दो चम्मच अजवाइन डाल दे, उसके बाद आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर दाल दे ,उसके थोड़ी देर बाद 8-10 लहसुन की कच्ची कली छीलकर तेल मे डाल दे और लहसुन कली के काली पड़ने पर गैस बंद कर दे । फिर उस तेल मे 5-6 कपूर की डली ठाल दे । ठंडा होने पर इस तेल को छानकर किसी काँच की बोतल मे भर दे और फिर इस तेल की जोडो पर और कमर पर (अगर कमर दर्द हो तो ) हल्के हाथ से मालिश करे ।


हल्का गरम इस तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द में विशेष आराम मिलता है|
दिन में 3 -4 बार मालिश करना उचित है।

धन्यवाद
हेमन्त कुमार शर्मा

Monday, October 15, 2018

आयुर्वेदिक फेस पैक

*आयुर्वेदिक फेस पैक*
नमस्ते दोस्तो । आज हम यहा आपको आयुर्वेदिक फेस पैक के बारे मे बताने जा रहे है ।हम लोग अपने चेहरे को आकर्षक और चमकदार बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की महंगी फेस पैक और क्रीम का उपयोग करते है जिनमे अधिकतर कैमिकल का उपयोग होता है । जो कि आगे चलकर हमारी त्वचा और शरीर को नुकसान पहुंचाती है। हमे इन कैमिकल युक्त फेस पैक और क्रीम की जगह आयुर्वेदिक फेस पैक का इस्तेमाल करना चाहिए  जो कि मुल्तानी मिट्टी, सफेद चंदन ,संतरे के छिलके का पाउडर ,हल्दी, बेसन इत्यादि आयुर्वेदिक औषधियो से मिलाकर तैयार की जाती है और जिसका हमारे शरीर या त्वचा पर भी कोई दुष्प्रभाव नही होता है।
*उपयोग करने का तरीका* :- सबसे पहले अपने चेहरे को साफ पानी से धो ले। फिर आधा चम्मच फेस पैक पाउडर ले । फिर उस पाउडर मे गुलाब जल या कच्चा दूध या थोडा पानी मिलाऐ। इसे अच्छे से मिलाकर इसे अपने दोनो हाथो से चेहरे पर लगाकर हल्के हाथ से पाउडर के सूखने तक रगडते रहे । सूखने के बाद इसे 15-20 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़दे।फिर इसे ठंडे पानी से धो ले । आपका चमकता और दमकता चेहरा तैयार । यह फेस पैक इस्तेमाल करने के बाद आपको किसी अन्य क्रीम की जरूरत भी नही रहेगी ।
*अधिक जानकारी या आयुर्वेदिक फेस पैक के लिए संपर्क करे* ।
हेमन्त कुमार शर्मा
Whats app :-09624754206
Mobile No :- 08141584064

Wednesday, September 5, 2018

*बथुवा*


*बथुवा*

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बथुवा अंग्रेजी में Lamb's Quarters, वैज्ञानिक नाम Chenopodium album.

साग और रायता बणा कर बथुवा अनादि काल से खाया जाता  रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि *हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए प्लस्तर में बथुवा मिलाते थे* और हमारी बुढ़ियां *सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुवै के पाणी से बाल धोया करती।* बथुवा गुणों की खान है और *भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं तभी तो मेरा भारत महान है।*

बथुवै में क्या क्या है?? मतलब कौन कौन से विटामिन और मिनरल्स??

तो सुणो, बथुवे में क्या नहीं है?? *बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर है तथा बथुवे में कैल्शियम,  लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43  Kcal होती है।*

जब बथुवा शीत (मट्ठा, लस्सी) या दही में मिला दिया जाता है तो *यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बण जाता है* और साथ में बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड़ की डळी हो तो इस खाणे के लिए देवता भी तरसते हैं।

जब हम बीमार होते हैं तो आजकल डॉक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली ही खाणे की सलाह देते हैं ना??? गर्भवती महिला को खासतौर पर विटामिन बी, सी व लोहे की गोली बताई जाती है और बथुवे में वो सबकुछ है ही, कहणे का मतलब है कि *बथुवा पहलवानो से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है।*

यह साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है।  बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करें। नमक न मिलाएँ तो अच्छा है, यदि स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो काला नमक मिलाएँ और देशी  गाय   के घी से छौंक लगाएँ। बथुए का उबाला हुआ पानी अच्छा लगता है तथा दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है। किसी भी तरह बथुआ नित्य सेवन करें। *बथुवै में  जिंक होता है जो कि शुक्राणुवर्धक है मतलब किसै भाई कै जिस्मानी कमजोरी हो तै उसनै बी दूर कर सै बथुवा।*

बथुवा कब्ज दूर करता है और अगर *पेट साफ रहेगा तो कोए भी बीमारी के शरीर में लगेगी ही नहीं, गात म्हं ताकतऔर स्फूर्ति बनी रवैगी।*

कहने का मतलब है कि जब तक इस मौसम में बथुए का साग मिलता रहे, नित्य इसकी सब्जी खाएँ। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी पीएँ और तो और *यह खराब लीवर को बी ठीक कर देता है।*

*पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुए के रस में शकर मिलाकर नित्य पिएँ तो पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी।*

मासिक धर्म रुका हुआ हो तो दो चम्मच बथुए के बीज एक गिलास पानी में उबालें । आधा रहने पर छानकर पी जाएँ। मासिक धर्म खुलकर साफ आएगा। आँखों में सूजन, लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खाएँ।

पेशाब के रोगी बथुआ आधा किलो, पानी तीन गिलास, दोनों को उबालें और फिर पानी छान लें । बथुए को निचोड़कर पानी निकालकर यह भी छाने हुए पानी में मिला लें। स्वाद के लिए नींबू जीरा, जरा सी काली मिर्च और काला नमक लें और पी जाएँ।

*आप ने अपने दादा दादी से ये कहते जरूर सुणा होगा कि हमने तो सारी उम्र अंग्रेजी दवा की एक गोली भी नहीं ली। उनके स्वास्थ्य व ताकत का राज यही बथुवा ही है।*

मकान को रंगने से लेकर खाने व दवाई तक बथुवा काम आता है और हाँ सिर के बाल ...... के करेगा शम्पू इसकै आगै।

लेकिन अफशोस, *हम किसान ये बातें भूलते जा रहे हैं और इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने अपने खेतों में जहर डालते हैं।* म्हारै तै बावळा कुण होवैगा???

*तथाकथित कृषि वैज्ञानिकों (अंग्रेज व काळे अंग्रेज) ने बथुवै को भी कोंधरा, चौळाई, सांठी, भाँखड़ी आदि सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया और हम भारतीय चूं भी ना कर पाये।*
अब कटाक्ष --
और पढ़ ल्यो अंग्रेजी और बण ल्यो अंग्रेज, सुणो जै ना सुधरे नै तै *एक दिन इस जहर तैं कैंसर बरगी बीमारी आपा नै सबनै मारैगी* क्योंकि आपां ए इस स्वर्ग बरगी जमीन नै जहर गेर कै नरक बणाण लाग रे सां। 🙏
भगवान् सिंह भदौरिया
9335980992


हमारा भोजन ही हमारा अमृत है ।

आप सभी को नमस्कार ।एक बात है की आजकल हर कोई Short Cut में पड़ा हुआ है । और कैसा भी हो बस स्वाद चाहिए चाहे वो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ह...