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Monday, May 29, 2017

गर्भवती स्त्री के लिए नियम संयम

      🌻 *गर्भवती स्त्री के लिए नियम- संयम* 🌻




😇😇 ~गायनेकोलॉजिस्ट~😇😇
*हम सबका अनुभव है कि अब से 20 -25 साल पहले तक 1% प्रसव (delivery) ऑपरेशन से होते थे। जब से गर्भवती महिलाओं में गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाने का प्रचलन बढ़ा है, 70% प्रसव ऑपरेशन से होने लगे हैं। आँकड़ें कहते हैं कि पूरे देश में केवल 7% प्रसव ऑपरेशन से होते हैं। वास्तव में आज भी केवल 10% गर्भवती महिलाएँ ही गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाती है, उनमें से 70% पूरे देश की महिलाओं का 7% ही होता है।*
स्वाभाविक है कि या तो गायेकोलॉजिस्ट अज्ञानी है या इसके पीछे कोई भयानक षड्यंत्र है। पहले अज्ञान की बात-
*गायनेकोलॉजिस्ट का अज्ञान –*
✍हमारे यहाँ की अनपढ़ से अनपढ़ महिला भी जानती है कि गर्म आहार से गर्भस्राव (miscarriage) हो सकता है;
इसलिए गर्भवती को गुड़, तला भोजन, गर्म मसाला, पपीता, लहसुन, बैंगन, दही आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन जैसे ही कोई गर्भवती महिला डॉक्टर के पास जाती है, वे उसे आयरन और कैल्शियम की कमी बताकर आइरन-कैल्शियम देना शुरु कर देती हैं। *आइरन-कैल्शियम दोनों ही बहुत गर्म होते हैं।*
परिणाम-गर्भाशय का मुँह खुलना - खून गिरना -
✍डॉक्टर द्वारा बेड रेस्ट की सलाह बेड रेस्ट से शरीर में सूजन – सूजन से सामान्य प्रसव में दिक्कत – अंत में ऑपरेशन की नौबत।
✍दूसरी ओर आज पैदा होते ही बच्चों को पीलिया (jaundice) हो रहा है या उनके हार्ट के वॉल्व में छेद होता है
सामान्यतः 10 से 15 वर्ष पित्त विकृत रहने के बाद हार्ट के वॉल्व में छेद होता है।
✍बच्चे ऑटिस्टिक डिस्लेकसिक हो रहे हैं या 2-3 वर्ष के होते ही चश्मा लगाने लग गये हैं।
ये सब *गर्म औषधियों के सेवन कराने का ही परिणाम है।* इन सबसे गर्भाशय को भी बहुत नुकसान होता है। इसी का परिणाम है कि आज गर्भाशय की बीमारियों की और उनसे मुक्ति के लिए गर्भाशय निकलवाने की बाढ़ सी आ गई है।
*गायनेकोलॉजिस्ट का षड्यंत्र –*
✍ एक स्वाभाविक प्रसव में कोई विशेष कमाई नहीं होती, लेकिन सीजेरियन डिलीवरी में कितनी कमाई होती है यह किसी से छिपा नहीं है।
*ज्योतिष का दुरुपयोग –*
✍कुछ गायनेकोलॉजिस्ट तो सीजेरियन डिलीवरी के लिए ज्योतिष के ज्ञान का दुरुपयोग करती हैं, वे कहती हैं, "देखो! तुम्हारी डिलीवरी का दिन बड़ा अशुभ है, उस दिन हुई संतान में कई दोष होंगे; लेकिन उसके चार-पाँच दिन पहले बड़ा शुभ दिन है, उस दिन होनेवाली संतान बड़ी गुणी होगी। गुणी संतान चाहिए तो कराओ ऑपरेशन!"
*संस्कारित बच्चे के जन्म के लिए गर्भाधान के दौरान शुभ मुहूर्त देखना होता है, जब गर्भाधान ही महूर्त के अनुसार नहीं होता है तो प्रसव के लिए कृत्रिम मुहूर्त रचने से क्या लाभ होगा?*
✍ सीजेरीयन डिलीवरी के लिए कैची (scissor) का उपयोग किया जाता है, कैची लोहे की होती है, लोहे में शनि का वास होता है। अभी जो बच्चा धरती पर आया नहीं और उस पर शनि की दृष्टि पड़ गई, उस बच्चे का क्या भविष्य होगा?
*आइरन-कैल्शियम*
✍गायनेकोलॉजिस्ट कहती है कि आइरन-कैल्शियम की कमी दूर नहीं करेंगे, तो बहुत सी समस्याएँ खड़ी हो जायेगी। बात बिल्कुल सही है, लेकिन यदि उनको वास्तव में यह चिंता है तो उनका एसोसिएशन यह प्रचार अभियान क्यों नहीं चलाता कि स्त्रियाँ तभी गर्भ धारण करें जब उनके शरीर में आइरन-कैल्शियम की कमी न हो? गर्भधारण करने के बाद ही वो क्यों जागती हैं? जबकि आप जानती हैं कि गर्भवती के लिए आइरन-कैल्शियम हानिकारक है। ऐसी स्थिती ही क्यों आने देती हैं, जहाँ एक ओर कुआँ और दूसरी ओर खाई हो?
*आयरन कैल्सियम की कमी को दूर करने का उपाय-*
✍जब आइरन कैल्शियम की कमी हो, तब शरीर में बढ़ रहे वात-पित्त को नियंत्रित करें। सूखेपन (वात) के कारण शरीर, भोजन से कैल्शियम अवशोषित (absorb) नहीं कर पाता है। जबर्दस्ती कैल्शियम के लिए *चूने* का सेवन कराने पर, यह किडनी या पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) में पथरी, आँख में मोतियाबिंद, हड्डियों की विकृति या हृदय की धड़कन को तेज करने का काम कर सकता है। *दूध में गाय का घी डालकर पीने से दूध का कैल्शियम सुपाच्य हो जाता है साथ ही चूने के पानी के सेवन से यह समस्या खत्म हो सकती है।*
*चूना लेने की विधि*—
✍पान वालों के पास मिलने वाले चूने की ट्यूब को एक लीटर पानी में डालकर अच्छी तरह मिलायें, एक-दो घंटे बाद उस जल को निथारकर (leach) काँच की बोतल में रख ले, *शेष चूना फेंक दें,*
दिन में तीन बार दो-दो चम्मच पानी दूध, फल के रस या दाल आदि में मिलाकर ले लें।
पित्त के बढ़ने से खून का लौहतत्त्व (iron) नष्ट होने लगता है। दूध में घी लेने से पित्त कम होता है। गाय का दूध लोहे की कढ़ाई में धीमे-धीमे गर्म करने पर दूध में लौहतत्त्व की मात्रा बढ़ जाती है।
सब्जी हमेशा लोहे की कढ़ाई में बनानी चाहिए इससे आयरन की मात्रा बढ़ती है, non-stick या   अल्मुनियम के बर्तनों में भोजन न पकाएं
*सावधानी:*
1. दूध गाय का ही हो क्योंकि अन्य दूध को अधिक देर तक गर्म करने से उनके तत्त्व नष्ट हो जाते हैं।
2. लोहे के गर्म तवे या लोहे की कढ़ाई में पानी डालने से भी पानी आइरन युक्त हो जाता है, लेकिन वह पानी पित्त को बढ़ाता है। ]
*अनार के रस से भी आइरन प्राप्त किया जा सकता है।*
✍ रात को अनार के दानों को लोहे की कढ़ाई में मसलकर कपड़े से ढककर रख दें। सुबह इसे छानकर पी लें।
*इन उपायों को करने से किसी स्त्री में कभी खून, कैल्सियम की कमी नही हो सकती न ही सिजेरियन डिलिवरी की नौबत आयेगी।*
।। जय श्री हरि ।।
(साभार: - डा भगवान सिंह भदौरिया)

कनकपुरिया हाजमे का पाउडर

🌻 *कनपुरिया बुकनू / हाजमे का पाउडर* 🌻
खानपान के मामले में कानपुर शहर की पहचान कानपुर के स्पेशल बुकनू (हाजमे का पाउडर) से होती है, सैकड़ों साल पुरानी ये परंपरा आज भी कायम है।
बुकनू चूरन भी है, मसाला भी है, इसे परांठा रोटी के ऊपर बुरक कर, चाट के ऊपर बुरक कर या मसाले की तरह दाल सब्जी में टेस्ट बढाने के लिये डाल कर खा सकते हैं. इसे बनाने के लिये किचन में प्रयोग करने वाले मसालों के साथ कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां भी प्रयोग की जाती हैं जो हमारे पाचन को सही बनाये रखती है।
*सामग्री:*
सादा नमक - 50 ग्राम
काला नमक - 125 ग्राम
सेंधा नमक (व्रतका नमक ) - 250 ग्राम
हल्दी - 75 ग्राम
बड़ी हर्र - 50 ग्राम
छोटी हर्र - 50 ग्राम
बहेड़ा -50 ग्राम
सूखा आंवला - 50 ग्राम
भुना जीरा - 25 ग्राम
भुनी अजवायन - 25 ग्राम
महीन सोंफ - 25 ग्राम
बड़ी इलाइची - 25 ग्राम
काली मिर्च - 25 ग्राम
सोंठ - 25 ग्राम
छोटी पीपर - 20 ग्राम
बायविरंग - 20 ग्राम
मरोड़ फली - 20 ग्राम
छोटी इलाइची - 10 ग्राम
खाने वाला नौसादर - 10 ग्राम
असली हींग - 2 ग्राम
सरसों का तेल - 100 ग्राम
इन सामग्रियों से तैयार बुकनू सभी प्रकार की पेट की गड़बड़ियों को एक खुराक में ठीक कर देता है, मुँह का स्वाद बना देता है।
।। जय श्री हरि।।
✍ भगवान सिंह भदौरिया
🏘 कानपुर
☎ 9335980992

मासिक समय से न आना

🌻 *मासिक समय से न होना/ गर्भ न ठहरना* 🌻
नाभि विचलन होने, थाइराइड होने, अत्यधिक मोटापा होने या पेट के लगातार ख़राब होने के कारण वायु रोग की अधिकता होने से बहुत सी महिलाओं को मासिक सम्बंधित समस्या आ जाती है, विवाहित महिलाओं को गर्भ न ठहरने की शिकायत हो जाती है, डॉक्टर्स लगातार चेकअप करते हैं लेकिन कोई समस्या पता नही चलती, ऐसी स्थिति को समझें।
सबसे पहले नाभि विचलन की जाँच कराएं, यदि नाभि विचलित है तो उसे ठीक कराएं, गर्भाशय में गैस, कफ की अधिकता और चर्बी ज़्यादा हो जाने से गर्भाशय का मुँह संकुचित हो जाता है जिसके कारण मासिक समय से नही आते, कम आते हैं या बिलकुल भी बंद हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में 2 दिन का फलाहारी व्रत रह कर अन्न और नमक को रोकना होता है, इसके बाद सादा भोजन लेते हुए 45 दिनों तक *महा योगराज गुग्गल* एक- एक गोली सुबह शाम गुनगुने पानी से लेने से गर्भाशय का मुँह खुल जाता है और मासिक ठीक होने लगते हैं, गर्भाशय गर्भ धारण करने के योग्य हो जाता है।
लेकिन ये उपचार किसी अनुभवी चिकित्सक की देख रेख में ही लेना चाहिए।
।। जय श्री हरि ।।
✍ भगवान सिंह भदौरिया
🏘 कानपुर
☎ 9335980992

भगंदर

🌻🌻 भगन्दर 🌻🌻
बवासीर लंबे समय तक रहने से भगन्दर होने की सम्भावना बढ़ जाती है इसमें गुदा के पास खुजली शुरू होती है उसके बाद धीरे धीरे फुडिया निकलती है ये आगे चल कर कैंसर भी बन सकती है।
भगन्दर हड्डी में भी छेद कर देता है।
इसलिए इसका उपचार प्रारंभिक अवस्था में ही कर लेना चाहिए।
खान पान पर विशेष ध्यान देना होता है
भगंदर के लिए चोपचीनी और मिस्री पीस कर इनके बराबर देशी घी मिलाइए। 20-20 ग्राम के लड्डू बना कर सुबह शाम खाइए। परहेज नमक तेल खटाई चाय मसाले आदि हैं। अर्थात फीकी रोटी घी शक्कर से खा सकते हैं। दलिया बिना नमक का हलवा आदि खा सकते हैं। इससे 21 दिन में भगन्दर सही हो जायेगा।
पतंजलि की अर्श कल्प वटी का सेवन सुबह शाम करें।

प्रसूता (गर्भवती स्त्री) का भोजन सरीरा बनाना

🌼 *प्रसूता का भोजन (हरीरा) बनाना* 🌼
*सामग्री*:
गुड़ 200 ग्राम
सोंठ 1 चम्मच
अजवाइन 1/2 चम्मच
हल्दी 1 चम्मच
जीरा 1 चम्मच
पिप्पली 1/2 चम्मच
गोंद 1 चम्मच
सतावर चूर्ण 1 चम्मच
सरसों तेल 2 से 3 चम्मच
देशी घी 4 चम्मच
बादाम बारीक़ कटा हुआ 1/2 चम्मच
छोटी इलायची 4 पीस पिसी हुई
इसके अलावा जो मेवा मिलाना चाहें उसे बारीक़ काट लें।
*विधि:*
गोंद, सोंठ, पिप्पली को देशी घी में भून कर बारीक़ पीस लें।
गुड़ को एक बर्तन में गुड़ की मात्रा के बराबर पानी डाल कर आग पर गर्म करके गुड़ पिघला लें, स्टील जाली की छ्लनी में छान लीजिये.
कढ़ाई में घी डालकर गरम कीजिये, जीरा पाउडर. हल्दी पाउडर, अजवायन पाउडर सहित सभी सामग्री डालिये, हल्का महक आने तक भूनिये. कटे हुये मेवा डालिये और 1-2 मिनिट लगातार चलाते हुये एकदम धीमी गैस पर भून लीजिये. इस भुने मसाले में गुड़ के घोल को डालिये, और उबाल आने के बाद 3-4 मिनिट तक पकने दीजिये या इतना गाढ़ा होने तक पकने दीजिये कि हरीरा को उंगली पर चिपका कर देखें तो वह उंगली पर चिपकना चाहिये, इसमें 2 से 3 चम्मच सरसों का तेल मिला कर पकाएं।
ये इतना स्वादिष्ट होता है कि घर के बाकी सदस्य भी इसका स्वाद ले सकते हैं।
यह गरमा गरम हरीरा प्रसूता यानि नई मां एक बार में आधा कटोरी खाने के लिये दीजिये,
*इसे फ्रिज में स्टोर करके रख सकते हैं लेकिन खिलाने के समय इसे गर्म करके ही दिया जाना चाहिए।*
बच्चे के जन्म के बाद, 20 से 25 दिन तक यह हरीरा, इतनी ही मात्रा में रोजाना 2-3 बार खाने को दीजिये, ये गर्भाशय की सफाई कर देगा, पेट बाहर नही निकलने देगा, दूध में वृद्धि करेगा, नवजात शिशु को होने वाली साधारण बिमारियों सर्दी जुक़ाम बुखार से बचाता है, साथ ही साथ प्रसव के दौरान आने वाली कमजोरी को दूर करके उसको स्वस्थ्य होने में मदद करेगा।
।। जय श्री हरि ।।
✍ भगवान सिंह भदौरिया
☎ 9335980992

हरिद्रा खंड

🌼 *हरिद्रा खण्ड* 🌼
हरिद्रा खंड हल्दी से बनी एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है।
इसके सेवन से शीतपित्त, खुजली, एलर्जी और चर्म रोग नष्ट होकर देह में सुन्दरता आ जाती है।
मेरा अनुभव है कि कई सालो से चलती आ रही एलर्जी या स्किन में अचानक उठने वाले चकत्ते ,खुजली इसके दो तीन माह के सेवन से हमेशा के लिए ठीक हो जाती है।
बाजार में मिलने वाली हरिद्राखण्ड प्रिजर्वेटिव मिली हुई होती है, इसका पूरा फायदा लेना है तो इसे बना कर 3 महीने में प्रयोग कर लेना चाहिए।
घर में हरिद्रा खण्ड बनाने की विधि आज भेज रहा हूँ।
🕉हरिद्रा (हल्दी) - 300 ग्राम,
🕉गाय का घी- 250 ग्राम,
🕉दूध- 5 किलो,
🕉मिश्री - 2 किलो.
🕉सोंठ ,कालीमिर्च,छोटी पीपल (पिप्पली),तेजपत्र, छोटी इलायची, दालचीनी, वायविडंग, निशोथ, हरण, बहेड़ा, आंवला ,नागकेशर,नागरमोथा, और लोह भस्म,
सभी 50-50 ग्राम
✍हल्दी को दूध में मिला कर खोया या मावा बनाये, इस खोये को घी डालकर धीमी आंच पर भूने,
भुनने के बाद इसमें पिसी मिश्री मिलाये.
सभी औषधियों को पीस कर छान लें, इनका बारीक़ चूर्ण इस मिश्रण में मिलाएं, अच्छी तरह से पक जाने पर इसकी बर्फी या नीम्बू के आकार के लड्डू बना लें।
✍एक एक चम्मच बर्फी या एक लड्डू दिन में दो बार दूध के साथ लें।
।। जय श्री हरि ।।
✍ भगवान् सिंह भदौरिया
☎ 9335980992

सेक्स के नाम से बिकने वाली दवाओ का सच

🌻 *सेक्स के नाम से बिकने वाली दवाओं (देशी वियाग्रा) के नाम से धोखा* 🌻
आजकल बाजार में सेक्स संबंधित दवाओं की भरमार है, जो अलग अलग नामों से बाजार में ऊंची कीमत में बेची जा रही हैं, लेकिन इन दवाओं के प्रयोग से पहले किसी जानकार से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
ज़्यादातर सेक्स संबंधित दवाओं के लिए *कामिनी विद्रावण रस* दिया जाता है,इसका असर तुरंत दिखाई देता है, आइए इसके परिणामों पर एक नजर डालते हैं।
पहले देखते हैं कि ये बनती कैसे है।
इस दवा में, *हिंगुल, गंधक, अकरकरा, सोंठ, लौंग, केशर, पिप्पली, जायफल, जावित्री, सफ़ेद चन्दन्, अहिफेन*
की अलग अलग मात्रा मिलाई जाती है,
इसके परिणाम पर भी नजर डालते हैं।
👉यह वीर्य को गाढ़ा करता है।
👉यह स्तम्भन में सहायक है।
👉यह नाड़ियों को ताकत देता है।
👉यह शीघ्रपतन में लाभदायक है।
👉यह रस यौन प्रदर्शन को सुधारने में सहायक है।
कामिनी विद्रावण रस किस मरीज को देना चाहिए:
जिन मरीजों को नीचे लिखी शिकायत हो उन्हें ये दवा केवल चिकित्सक से सलाह लेकर उचित मात्रा में लेनी चाहिए
👉वीर्य का पतलापन
👉नसों की कमजोरी
👉शीघ्रपतन
👉उर्जा, जोश की कमी
👉कामेच्छा की कमी
👉नामर्दी
अब आइए इस दवा के दुष्प्रभाव को भी जान लेते हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति शौकिया रूप में इसे लेने की गलती भी न् करे।
👉इसमें अफीम है, अधिक समय तक लेने पर आप इसके आदि हो सकते हैं।
👉इसके सेवन से कब्ज़ की शिकायत हो जाती है।
👉यह मूत्र की मात्रा को भी कम कर देती है।
👉एक बार इसकी आदत पड़ जाने पर इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है।
👉छोड़ने पर व्यक्ति को बार बार लूज़ मोशन आते हैं, उलटी जैसा लगता है और इसे लेने की इच्छा होती है।
👉इसकी लत को छुड़ाने के लिए बहुत कोशिश और प्रोफेशनल की सहायता भी पड़ सकती है।
👉 *शुरू में यह सेक्स परर्फोर्मांस को बढ़ाने में सहयोगी है लेकिन कुछ महीने यदि लगतार इसका सेवन कर लिया जाए तो सेक्स करना भी मुश्किल हो जाता है।*
इसलिए केवल विज्ञापनों के भ्रमजाल में न् फंसें,
।। जय श्री हरि ।।
✍ भगवान् सिंह भदौरिया
☎ 9335980992

आयुर्वेदि चाय बनाने का तरीका

🌻 *आयुर्वेदिक चाय*🌻
तुलसी पत्ते (सूखे) 500 ग्राम
तेज पत्ता 100 ग्राम
दालचीनी 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
ब्राह्मी 100 ग्राम
सौंफ 250 ग्राम
बनफसा 50 ग्राम
लाल चंदन 250 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्राम
छोटी इलायची 150 ग्राम
✍�इन सब सामग्री को मिला लें, खल-बत्ते में या मिक्सी में पीस कर दलिया जैसा बना लें।
✍�आपकी चाय तैयार है।
✍�आठ कप चाय बनाने के लिए इसकी 1 चम्मच पर्याप्त है।
✍�इसे पानी में मिला कर उबालें, 3 उबाल आने के बाद थोड़ी चीनी मिल कर दूध मिला लें।
✍� *ये चाय पेट को ठीक रखती है, शरीर में स्फूर्ति लाती है, चेहरे पर कांति आती है, दाग-धब्बे मिट जाते हैं।*
।। जय श्री हरि ।।
✍� *भगवान सिंह भदौरिया*
☎ 9335980992

हमारा भोजन ही हमारा अमृत है ।

आप सभी को नमस्कार ।एक बात है की आजकल हर कोई Short Cut में पड़ा हुआ है । और कैसा भी हो बस स्वाद चाहिए चाहे वो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ह...